आपने बच्चे को शोषण से बचाने के लिए ऐसे समझाएं क्या है गुड और बैड टच।

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी क्लास के प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या का मामला फिर दिल्ली के एक स्कूल में पांच साल की बच्ची के साथ रेप की वारदात। ये घटनाएं हमे डराने के साथ सबक देती है, और सोचने पर मजबूर कर देती है कि स्कूल जिसे की हम दूसरा घर समझ कर बच्चो को पढ़ने के लिए छोड़ देते है। क्या वो वह सुरक्षित है?

बच्चे हमारे दिल का टुकड़ा होते हैं। उनकी एक आह पर हमारी चीख निकल जाती है। उनकी हर ख्वाहिश को हम सिर आंखों पर रखते हैं। वे हमारे लिए बेशकीमती हैं लेकिन जब बच्चों के साथ शोषण की कोई घटना होती है तो दिल सुन कर ही कांप उठता है।

ऐसी घटनाएं पैरेंट्स को डराने के साथ यह सीख भी देती हैं कि उन्हें अपने बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में बताना चाहिए ताकि वे शोषण का शिकार न हों। जिस तरह हम बच्चे को बताते हैं कि अनजान शख्स से कोई खाने वाली चीज नहीं लेनी चाहिए, ठीक उसी तरह हमें उन्हे यह भी सिखाना चाहिए कि अगर कोई उन्हें गलत जगह छूए तो उन्हे घर में परिवार के सदस्य बताना चाहिए। आइए जानते हैं वो बातें, जिन्हें अपने बच्चे को सीखाकर आप उसे शोषण से बचा सकते हैं।

बच्चे को नहलाते वक्त समझाएं

बच्चे को नहलाते वक्त उसके शरीर के अंगों के बारे में उसे बताएं। साथ ही यह समझाएं कि अगर कोई व्यक्ति उनके इन अंगों को छूता है तो वह इस बारे में घर पर बताएंगे। उन्हें समझाएं कि ये अंग उसके अलावा कोई और नहीं छू सकता, चाहे वह परिवार का कोई सदस्य या कोई जानने वाला ही क्यों न हो। अगर बच्चे के दिमाग में यह बात बैठ गई कि उसके इन अंगों को कोई न देख सकता है और न ही छू सकता है तो उसके शोषण का शिकार होने की आशंका कम हो जाती है।

प्यार का सही मतलब बताएं

 

बच्चे को अक्सर प्यार करने के बहाने एकांत जगह पर ले जाकर उनके साथ गलत हरकत की जाती है। ऐसे में बच्चे को यह बात समझाएं कि कभी भी किसी भी व्यक्ति के साथ वह एकांत जगह पर खेलने न जाएं। अगर कोई व्यक्ति जबरदस्ती उनसे प्यार करने की कोशिश करता है। उन्हें गोद में बिठाता है या बात-बात पर किस करता है तो इस बारे में उन्हें बताए। बच्चे के साथ-साथ यह आपकी भी जिम्मेदारी है कि आसपास के लोगों पर नजर रखें। अगर कोई हद से ज्यादा बच्चे के प्रति प्यार दिखाने की कोशिश करता है तो उससे सावधान रहें।

दोस्त बनकर कहानी सुनाएं

 

बच्चे के दिल की बात जानने के लिए आपको उसका दोस्त बनना पड़ेगा। कोशिश करिए कि बच्चा आपसे दिल की बात कहने में कभी न डरे। बच्चे की गलती होने पर भी डांटने या मारने की बजाय समझाने की कोशिश करें। इससे बच्चा बेझिझक अपनी बात आप से कह पाएगा। अगर पिटाई का डर होगा तो आपको वो दिल की बात कभी नहीं बताएगा। वहीं गुड और बैड टच को समझाने के लिए आप उसे कहानी सुना सकते हैं। किसी दूसरे बच्चे की घटना का जिक्र करते हुए आप उसे आराम से समझा सकते हैं कि बैड टच किस तरह से उसके लिए खतरनाक है और ऐसा करने वाले के बारे में तुरंत घरवालों को बताना चाहिए। अगर आप उसके दोस्त बनकर उसकी प्रॉब्लम सॉल्व करेंगे तो रिटर्न में आपको उसके बारे में सब कुछ पता चलेगा।

टीवी बंद न करें बल्कि बात करें

 

बच्चों को अडल्ट फिल्मों से दूर रखना निश्चित रूप से आपकी जिम्मेदारी है। आज के वक्त में जब बच्चे ऑनलाइन गेमिंग के एडिक्ट हो रहे हैं। ऐसे में बच्चा इंटरनेट पर गलत चीजें न देखे। इसके लिए जरूरी है कि इंटरनेट पर पासवर्ड या गैरजरूरी साइट्स को बैन कर के रखें। हालांकि, टीवी पर कोई सीन या ऐड आते वक्त चैनल बदलने के बजाय बच्चे से उस बारे में बात कर समझाने की कोशिश करें कि वह उसके लिए गलत है। अगर आप बच्चे के साथ बात करने में कम्फर्टेबल हैं तो वह भी अपनी  बात आपसे बेझिझक कह पाएगा।

शेयरिंग ही है असली केयरिंग

 

बच्चे से उसके स्कूल से लेकर खेलने तक के बारे में बात करें। अगर आप उससे रोज बात करेंगे और उसकी बातें सुनेंगे कि वह किसके साथ खेलता है? किसने उससे क्या कहा? इससे आपको यह पता चलता रहेगा कि उसके दोस्त किस तरह से बात करते हैं। इस तरह वह अपनी शिकायतें भी आपको बता पाएगा। बच्चे को हमेशा सिखाइए कि कोई भी गलती हो, वह बेझिझक आपसे अपनी बात कह सकता है। उसके दोस्त बनकर रहिए ताकि जरूरत के मौके पर वह आपसे खुलकर अपने दिल की बात कह सके। अगर बच्चे को यह भरोसा हो गया कि गलती होने पर भी आप उसका साथ देंगे तो कभी भी वह आपसे कोई बात नहीं छुपाएगा।

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